Sarvam AI Edge भारत की टेक दुनिया में एक बड़ा कदम सामने आया है। भारतीय कंपनी ने ऐसा प्लेटफॉर्म पेश किया है जो इंटरनेट के बिना भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर्स चलाने का दावा करता है। नए ऑन-डिवाइस सिस्टम की मदद से अब स्मार्टफोन और लैपटॉप पर स्पीच पहचान, ट्रांसलेशन और टेक्स्ट-टू-स्पीच जैसे काम सीधे डिवाइस पर किए जा सकेंगे। कंपनी का कहना है कि इससे प्राइवेसी, स्पीड और भरोसेमंद उपयोग तीनों में सुधार होगा।
ऑन-डिवाइस टेक्नोलॉजी: इंटरनेट के बिना भी काम करेगा AI
भारत की कंपनी Sarvam AI ने ‘Sarvam Edge’ नाम का प्लेटफॉर्म पेश किया है। यह क्लाउड सर्वर पर निर्भर रहने के बजाय सीधे डिवाइस की प्रोसेसिंग क्षमता का उपयोग करता है। यानी यूजर को नेटवर्क या डेटा कनेक्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी।इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह नेटवर्क डिले खत्म करता है। अक्सर खराब इंटरनेट वाले क्षेत्रों में डिजिटल सेवाएं सही तरीके से काम नहीं कर पातीं, लेकिन ऑन-डिवाइस मॉडल में प्रोसेसिंग लोकल होती है, इसलिए रिजल्ट तुरंत मिलता है। इसके साथ डेटा डिवाइस से बाहर नहीं जाता, जिससे प्राइवेसी मजबूत रहती है।
प्लेटफॉर्म मल्टीलिंगुअल सपोर्ट के साथ आता है। इसमें speech recognition, text-to-speech और real-time translation जैसे फीचर्स शामिल हैं। एक ही मॉडल कई भारतीय भाषाओं को पहचान सकता है और ऑटोमैटिक भाषा पहचान सुविधा भी दी गई है। इससे यूजर को भाषा चुनने की जरूरत नहीं रहती।कंपनी के अनुसार यह तकनीक voice-based apps, accessibility tools और education apps जैसे क्षेत्रों में उपयोगी होगी। खासकर ग्रामीण इलाकों में, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर रहती है, वहां यह टेक्नोलॉजी डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ा सकती है।
उपयोग और भविष्य: रोजमर्रा की टेक्नोलॉजी में बड़ा बदलाव
नया प्लेटफॉर्म दिखाता है कि अब एआई सेवाएं केवल बड़े सर्वर या डेटा सेंटर तक सीमित नहीं रहेंगी। मोबाइल प्रोसेसर और लैपटॉप हार्डवेयर में बढ़ती कंप्यूटिंग क्षमता को ध्यान में रखते हुए सिस्टम को ऑप्टिमाइज़ किया गया है ताकि स्टोरेज और बैटरी पर ज्यादा असर न पड़े।ऑफलाइन प्रोसेसिंग का मतलब यह भी है कि प्रति-क्वेरी लागत कम होगी। यानी डेवलपर्स को हर बार सर्वर कॉल का खर्च नहीं देना पड़ेगा। इससे छोटे स्टार्टअप और ऐप डेवलपर्स के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।
रियल-टाइम ट्रांसक्रिप्शन लाइव ऑडियो से तेज बताया गया है और ट्रांसलेशन लगभग तुरंत मिल सकता है। ऐसे फीचर्स ग्राहक सेवा, हेल्थ-टेक और सरकारी सेवाओं में उपयोगी हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, अलग-अलग भाषा बोलने वाले नागरिकों के बीच संवाद आसान बनाया जा सकता है।विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में स्मार्टफोन ही पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट का मुख्य केंद्र बनेंगे। अगर एआई फीचर्स ऑफलाइन उपलब्ध होते हैं, तो डेटा सुरक्षा और भरोसे का स्तर बढ़ेगा। इससे डिजिटल सेवाओं के उपयोग में तेजी आने की संभावना है।
यह लॉन्च दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अगला चरण क्लाउड से आगे बढ़कर सीधे यूजर डिवाइस तक पहुंच रहा है। ऑफलाइन, तेज और सुरक्षित अनुभव आने वाले समय में टेक्नोलॉजी उपयोग की दिशा बदल सकता है, खासकर भारत जैसे बड़े और विविध नेटवर्क वाले देश में।
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