Social Media: भारत में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। केंद्र सरकार कम उम्र के यूजर्स के लिए प्लेटफॉर्म एक्सेस सीमित करने पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 16 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए नई डिजिटल पॉलिसी लागू हो सकती है। यह कदम डीपफेक, साइबर बुलिंग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बढ़ती चिंताओं के बीच सामने आया है। अगर नियम लागू होते हैं तो देश में इंटरनेट उपयोग की आदतों और टेक कंपनियों के बिजनेस मॉडल दोनों पर असर पड़ सकता है।
Social Media: बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या प्लान बना रही सरकार
सरकार का मानना है कि कम उम्र के यूजर्स इंटरनेट पर सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं। हाल के वर्षों में ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी वीडियो और डिजिटल लत से जुड़े मामलों में तेजी आई है। इसी वजह से नीति-निर्माता आयु सत्यापन प्रणाली, पैरेंटल कंट्रोल और कंटेंट फिल्टर जैसे उपायों पर काम कर रहे हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि कंपनियों को यूजर की उम्र की पुष्टि करना जरूरी किया जा सकता है।
एक पैराग्राफ में Social media को लेकर चर्चा करते हुए बताया गया कि कई देशों ने पहले ही ऐसे नियम लागू कर दिए हैं और भारत भी उसी दिशा में कदम बढ़ा सकता है। टेक मंत्रालय ने प्लेटफॉर्म कंपनियों के साथ बैठकों में डीपफेक और गलत सूचना पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेफ्टी, data privacy और child protection policy जैसे कदम आने वाले समय में जरूरी बनेंगे। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित एल्गोरिद्म तैयार करने के लिए कहा जा सकता है ताकि बच्चों को हानिकारक कंटेंट कम दिखे।
विदेशी उदाहरण और कंपनियों पर संभावित असर
ऑस्ट्रेलिया कम उम्र के यूजर्स पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बन चुका है। वहां Instagram, Facebook, YouTube और X जैसे प्लेटफॉर्म पर आयु आधारित नियम लागू किए गए हैं। यूरोप के कई देश भी इसी तरह की नीति पर विचार कर रहे हैं। भारत में यूजर बेस बहुत बड़ा है, इसलिए किसी भी नए नियम का असर सीधे टेक कंपनियों की कमाई पर पड़ेगा।
दूसरे पैराग्राफ में Social media से जुड़े संभावित आर्थिक असर की चर्चा की गई है। देश में करोड़ों यूजर्स इन ऐप्स का उपयोग करते हैं और यह मार्केट वैश्विक कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर आयु सीमा लागू होती है तो यूजर ग्रोथ धीमी हो सकती है।टेक कंपनियों का तर्क है कि आयु सत्यापन तकनीकी रूप से कठिन है और इससे गोपनीयता से जुड़े नए सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं विशेषज्ञ कहते हैं कि ऑनलाइन सुरक्षा और किशोर मानसिक स्वास्थ्य को देखते हुए नियम जरूरी हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में सुरक्षित इंटरनेट उपयोग भविष्य की बड़ी जरूरत बन चुका है।
सरकार अभी विचार चरण में है और अंतिम नियमों की घोषणा बाद में होगी। लेकिन साफ है कि इंटरनेट उपयोग अब केवल तकनीकी नहीं, सामाजिक मुद्दा भी बन चुका है। आने वाले समय में प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार बनाना और बच्चों को सुरक्षित डिजिटल माहौल देना नीति का मुख्य लक्ष्य रहेगा। यह फैसला लागू होता है या नहीं, लेकिन इससे डिजिटल रेगुलेशन की दिशा जरूर तय होगी।
यह भी पढ़ें:- Infinix GT 50 Pro: गेमिंग लुक और 6500mAh बैटरी वाला नया बजट स्मार्टफोन जल्द






