Electric Car दुनियाभर में बढ़ते प्रदूषण और ईंधन की लागत के बीच ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तेजी से नई तकनीक की ओर बढ़ रही है। इसी दिशा में चीन की बैटरी निर्माता कंपनी CATL ने ऐसी नई बैटरी तकनीक पेश की है, जिससे कार चार्जिंग का समय नाटकीय रूप से घट सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह तकनीक भविष्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को ज्यादा व्यावहारिक और आसान बना सकती है।
Electric Car 12 मिनट में फुल चार्ज: नई बैटरी तकनीक कैसे बदलेगी सफर
नई बैटरी तकनीक का दावा है कि यह पारंपरिक बैटरी की तुलना में बहुत तेजी से चार्ज होगी। कंपनी के अनुसार बैटरी को लगभग 12 मिनट में फुल चार्ज किया जा सकता है। वर्तमान में अधिकांश वाहन को चार्ज होने में 40 मिनट से कई घंटे तक का समय लगता है, जिससे लंबी यात्रा करना चुनौतीपूर्ण बन जाता है।इस टेक्नोलॉजी का असर खास तौर पर हाईवे ट्रैवल पर पड़ेगा। फास्ट चार्जिंग के कारण चार्जिंग स्टेशन पर लंबा इंतजार कम होगा।
यही वजह है कि रिपोर्ट्स में कहा गया है कि Electric Car उपयोगकर्ताओं की सबसे बड़ी समस्या — चार्जिंग टाइम — काफी हद तक खत्म हो सकती है।बैटरी में स्मार्ट कूलिंग सिस्टम दिया गया है। यह चार्जिंग के दौरान तापमान को नियंत्रित रखता है। इसके अलावा सेल्फ-रिपेयर मैकेनिज्म बैटरी की लाइफ बढ़ाने में मदद करेगा। अनुमान है कि बैटरी 1.5 मिलियन मील चलने के बाद भी लगभग 80% क्षमता बनाए रख सकती है।
भविष्य की मोबिलिटी पर असर और कब तक मिलेगी कारों में
ऑटो इंडस्ट्री में Electric Car को लेकर सबसे बड़ा डर “रेंज एंग्जायटी” माना जाता है। तेज चार्जिंग आने से यह चिंता कम होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में EV अपनाने की रफ्तार बढ़ सकती है। खासतौर पर टैक्सी, डिलीवरी और लॉन्ग-ड्राइव उपयोगकर्ताओं के लिए यह बड़ा बदलाव होगा।
हालांकि अभी कंपनी ने यह साफ नहीं किया है कि यह तकनीक व्यावसायिक मॉडलों में कब उपलब्ध होगी। लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ वर्षों में नई पीढ़ी के वाहनों में इसे शामिल किया जा सकता है। ऑटो कंपनियां पहले से ही हाई-स्पीड चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही हैं।विशेषज्ञ मानते हैं कि जब चार्जिंग समय पेट्रोल भरने के समय के करीब आ जाएगा, तब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पूरी तरह मुख्यधारा बन सकती है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा और ऊर्जा लागत भी घटेगी।
नई बैटरी तकनीक EV इंडस्ट्री के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। यदि यह बड़े पैमाने पर लागू होती है, तो चार्जिंग समय, बैटरी लाइफ और उपयोगिता से जुड़ी ज्यादातर समस्याएं खत्म हो जाएंगी। इससे वैश्विक स्तर पर स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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