Car Touch Screen Safety Rules: फिजिकल बटन की वापसी? नई सेफ्टी गाइडलाइन का असर

ऑटोमोबाइल सेक्टर में तेजी से बदलते केबिन डिजाइन के बीच एक बड़ा सुरक्षा बहस शुरू हो गया है। कई देशों में आधुनिक डिजिटल फीचर्स को लेकर नई गाइडलाइन बनाने पर चर्चा चल रही है। इसी कड़ी में car touch screen से जुड़े सेफ्टी मुद्दों ने ध्यान खींचा है, जहां ड्राइविंग के दौरान ध्यान भटकने के खतरे को लेकर विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में वाहन कंपनियों को इंटीरियर डिजाइन में बदलाव करने पड़ सकते हैं।

क्यों बढ़ रही है फिजिकल बटन की मांग?

Car touch screen पिछले कुछ वर्षों में वाहन निर्माता कंपनियों ने केबिन को ज्यादा डिजिटल और मिनिमल बनाने पर जोर दिया है। क्लाइमेट कंट्रोल, म्यूजिक, नेविगेशन और यहां तक कि जरूरी कंट्रोल भी अब स्क्रीन में शिफ्ट कर दिए गए हैं। इससे लुक प्रीमियम जरूर बनता है, लेकिन कई ड्राइवर इसे असुविधाजनक मानते हैं।सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ड्राइविंग के दौरान स्क्रीन पर ऑप्शन खोजने में समय लगता है। हाईवे स्पीड पर कुछ सेकंड की देरी भी ब्रेकिंग दूरी बढ़ा सकती है। इसलिए कई विशेषज्ञ “driver distraction” को रोड सेफ्टी का बड़ा कारण बता रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार नई गाइडलाइन में turn indicator, hazard light और emergency call जैसे फीचर्स के लिए अलग स्विच अनिवार्य करने पर विचार किया जा रहा है। इससे चालक बिना सड़क से नजर हटाए जरूरी काम कर सकेगा। यही कारण है कि “vehicle safety regulation” को अब टेक्नोलॉजी से ऊपर प्राथमिकता दी जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि digital dashboard पूरी तरह खत्म नहीं होगा, बल्कि hybrid system आएगा — जहां स्क्रीन और physical buttons दोनों मौजूद रहेंगे। इससे उपयोग आसान रहेगा और जोखिम कम होगा।

ऑटो इंडस्ट्री और ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?

अगर Car touch screen नए नियम लागू होते हैं, तो कंपनियों को अपने मॉडल दोबारा डिजाइन करने पड़ेंगे। अभी कई ब्रांड केवल बड़े डिस्प्ले पर निर्भर हैं, लेकिन भविष्य में cockpit layout बदल सकता है। इससे production cost बढ़ने की संभावना भी है।ग्राहकों के लिए यह बदलाव फायदेमंद माना जा रहा है। विशेषकर नए ड्राइवर और बुजुर्ग यूजर्स के लिए बटन आधारित सिस्टम ज्यादा सुरक्षित और आसान होता है। “road safety awareness” के बढ़ने के साथ लोग भी अब usability को प्राथमिकता देने लगे हैं।

भारत समेत कई देशों में भी इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हो चुकी है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले समय में global safety standards एक जैसे हो सकते हैं। इससे सभी बाजारों में एक समान नियम लागू होंगे।ऑटोमोबाइल इतिहास में पहले भी कई फीचर बदले गए हैं — जैसे ABS, एयरबैग और सीटबेल्ट अनिवार्यता। उसी तरह केबिन कंट्रोल भी अब सुरक्षा का हिस्सा बनते जा रहे हैं। कुल मिलाकर तकनीक और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना आने वाले दशक का सबसे बड़ा डिजाइन ट्रेंड बन सकता है।

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